धरमपुरी गाँव (चिखली, डूंगरपुर, राजस्थान 314030) - जनसंख्या, लिंगानुपात, सरपंच, खान-पान, रहन-सहन, रोजगार की पूरी जानकारी हिंदी में
*प्रस्तावना*
राजस्थान के डूंगरपुर जिले के चिखली ब्लॉक में बसा *धरमपुरी* गाँव आदिवासी संस्कृति का सच्चा प्रतीक है। पिनकोड 314030 वाले इस गाँव में 99.84% आदिवासी लोग रहते हैं। यह ब्लॉग आपको एक ही जगह पर धरमपुरी की जनसंख्या, लिंगानुपात, सरपंच, स्कूल, नजदीकी शहर, राज्य, एयरपोर्ट, खान-पान, रहन-सहन और रोजगार के लिए पलायन तक की पूरी जानकारी देगा।
1. सामान्य जानकारी
- गाँव: धरमपुरी, ग्राम पंचायत: भचारिया खास
- ब्लॉक: चिखली, तहसील: सिमलवाड़ा, जिला: डूंगरपुर, राज्य: राजस्थान
- पिनकोड: 314030, जनगणना कोड: 098225, कुल घर: 112, क्षेत्रफल: ∼150 हेक्टेयर
2. जनसंख्या (Jansankhya)
*2011 के अनुसार:* कुल 607 - पुरुष 295, महिला 312, 0-6 साल के बच्चे 131 (21.58%), साक्षर 302, साक्षरता 49.75%, ST 606 (99.84%), SC 0, काम करने वाले 223 लोग।
*2026 अनुमानित:* 740-750 लोग, लगभग 135-140 परिवार।
3. लिंगानुपात (Lingaanupat) - सबसे खास
धरमपुरी का लिंगानुपात राजस्थान से बेहतर है।
- *कुल लिंगानुपात: 1057* - 1000 पुरुषों पर 1057 महिलाएं। राजस्थान का औसत 928 है। (पुरुष 295, महिला 312)
- *बाल लिंगानुपात (0-6 साल): 845* - 1000 लड़कों पर 845 लड़कियां। (लड़के 71, लड़कियां 60) - यहाँ सुधार की जरूरत है।
- *वयस्क लिंगानुपात: 1125* - 1000 वयस्क पुरुषों पर 1125 महिलाएं। (वयस्क पुरुष 224, महिला 252)
- *2026 अनुमानित लिंगानुपात: 1084*
*कारण:* पुरुष रोजगार के लिए गुजरात-सूरत-मुंबई चले जाते हैं, महिलाएं गाँव संभालती हैं। आदिवासी समाज में बेटियों को बराबर सम्मान मिलता है।
4. सरपंच और पंचायत
- सरपंच: *देवेन्द्र दामोर*, सचिव: हीरालाल रेगर
- वार्ड: 5 (गीता, अमृतलाल, मार्ती, मोहनलाल कटारा, गौतमलाल)
- सुविधा: पंचायत भवन, BharatNet इंटरनेट, नल जल योजना, पक्की सड़क।
5. शिक्षा और मौसम
*स्कूल:* G.P.S. धरमपुरी - 1 सरकारी प्राथमिक विद्यालय (कक्षा 1-5), सह-शिक्षा। आगे की पढ़ाई चिखली (5 KM) में।
*मौसम:* 35°C साफ, AQI 61 Moderate, हवा 3 KM/घंटा, बारिश जून-सितंबर।
6. नजदीकी शहर और राज्य
*नजदीकी शहर (City):* चिखली 5 KM, सिमलवाड़ा 10 KM, डूंगरपुर 25 KM (जिला मुख्यालय), सागवाड़ा 28 KM, बांसवाड़ा 65 KM, उदयपुर 110 KM, अहमदाबाद 140 KM।
*नजदीकी राज्य (Rajya):* गुजरात सिर्फ 15-20 KM (सबसे नजदीक), मध्य प्रदेश 120 KM, महाराष्ट्र 600 KM। बॉर्डर के पास होने से व्यापार गुजरात से भी होता है।
7. अन्य सुविधाएं - Airport, Train, Hospital, Petrol Pump
- अस्पताल: CHC चिखली 5 KM, जिला अस्पताल डूंगरपुर 25 KM
- पुलिस थाना: चिखली 5-7 KM, फायर स्टेशन: डूंगरपुर 25 KM
- बस स्टैंड: भचारिया खास 1 KM, सेंट्रल बस स्टैंड डूंगरपुर 22 KM
- रेलवे स्टेशन: डूंगरपुर (DNRP) 30-35 KM
- एयरपोर्ट: महाराणा प्रताप एयरपोर्ट उदयपुर (UDR) 115 KM, दूसरा अहमदाबाद 140 KM
- पेट्रोल पंप: साई पेट्रोलियम KSK, सासलाई, चिखली 1-2 KM, 24 घंटे खुला
8. खान-पान (Khan-Paan)
- रोज का भोजन: मक्का की रोटी (सोगरा), छाछ, दाल-भात, रागी की रोटी
- प्रसिद्ध व्यंजन: बाफला-दाल, छाछ-राब (ज्वार के आटे को छाछ में पकाकर), कैर-सांगरी की सब्जी
- त्योहार पर: चूरमा, मालपुआ, लापसी, दाल-बाटी-चूरमा
- पीने में: छाछ, नींबू पानी, त्योहार पर महुआ। 90% शाकाहारी, खाना पूरी तरह जैविक।
9. रहन-सहन (Rahan-Sahan)
- घर: मिट्टी-ईंट के घर, दीवारों पर आदिवासी चित्रकारी, बड़ा आंगन, PM आवास से पक्के मकान भी।
- वेशभूषा: पुरुष धोती-कुर्ता-साफा, महिलाएं रंग-बिरंगा घाघरा-चोली, लाख की चूड़ियां, हंसली।
- भाषा: भीली, वागड़ी, मेवाड़ी मुख्य।
- त्योहार: होली, दिवाली, भगोरिया, मानगढ़ धाम मेला, ढोल-मांदल पर नाच। पूरा गाँव एक परिवार की तरह रहता है।
10. रोजगार - लोग गुजरात, मुंबई, सूरत क्यों जाते हैं?
*समस्या:* खेती बारिश पर निर्भर, साल में एक फसल, गाँव में कोई फैक्ट्री नहीं। 607 में से सिर्फ 223 लोग ही काम कर पाते हैं।
*कहाँ जाते हैं?*
- गुजरात (60%): खेड़ब्रह्मा, हिम्मतनगर, अहमदाबाद में भवन निर्माण, टाइल्स। बॉर्डर 15 KM होने से आना-जाना आसान।
- सूरत-बड़ौदा (15%): कपड़ा मिल, डायमंड पॉलिश, कंस्ट्रक्शन
- मुंबई-पुणे (10%): होटल, ड्राइविंग, सिक्योरिटी गार्ड
- उदयपुर-डूंगरपुर (10%): मनरेगा, ईंट भट्ठा
- रतलाम-इंदौर (5%): फैक्ट्री
*समय:* दिवाली बाद (नवंबर-दिसंबर) में गाँव खाली, होली और बुवाई (जून-जुलाई) में वापसी।
*कमाई:* गाँव में 250-300 रु दिन, गुजरात/सूरत में 400-600 रु दिन।
*निष्कर्ष:* मेहनत बहुत है, साधन कम हैं। छोटी फैक्ट्री लग जाए तो पलायन रुक सकता है।
अंतिम निष्कर्ष
धरमपुरी गाँव सादगी, एकता और मेहनत का प्रतीक है। लिंगानुपात 1057 होना इसकी सबसे बड़ी ताकत है। अगर आप ग्रामीण राजस्थान को समझना चाहते हैं तो धरमपुरी जरूर आइए।
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